उर्दू विभाग में शोक सभा

NEWS.ALIGARH, January 12, 2021 | NEWS.PUBLIC_RELATION_OFFICE
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अलीगढ़, 12 जनवरीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविधालय के उर्दू विभाग में प्रख्यात लेखक एवं आलोचक प्रो. शम्सुर रहमान फारूकी और उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जफर अहमद सिद्दीकी के निधन पर समाजिक दूरी का पालन करते हुए एक शोक सभा का आयोजन किया गया।

शोक सभा की अध्यक्षता करते हुए फारसी की विद्वान और फारसी शोध संस्थान की पूर्व निदेशक प्रो. आज़रमी दुख्त सफवी ने प्रो. फारूकी और प्रो. अहमद को अपनी श्रृद्वांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि यह दोनों लोग जिस प्रकार से उर्दू भाषा और साहित्य के बड़े विद्वान थे उसी प्रकार इनका सम्बन्ध फारसी परम्परा से भी था। वह फारसी साहित्य के शास्त्रीय साहित्य से लेकर आधुनिक साहित्य से परिचित थे।

उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद अली जोहर ने कहा कि प्रो. शम्सुर रहमान फारूकी को आलोचना के साथ इतिहास और फिक्शन पर पूरी तरह महारत हासिल थी। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण उनका उपन्यास ‘‘कई चांद थे सरे आसमां’’ है।

प्रो. जौहर ने कहा कि प्रो. जफर अहमद सिद्दीकी से उनका बड़ा ही भावुक सम्बन्ध था और वह न केवल एएमयू बल्कि इससे बाहर भी अपनी विद्वता के लिये जाने जाते थे।

मास कम्यूनिकेशन विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाफे किदवई ने प्रो. शम्सुर रहमान फारूकी के उपन्यास पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रो. शम्सुर रहमान फारूकी की पुस्तकों का हवाला देते हुए कहा कि केवल उनको देख कर अन्दाजा हो जाता है कि उनका कितना बड़ा महान व्यक्तित्व था।

शोक सभा को प्रो. काजी जमाल हुसैन, प्रो. काजी अफजाल हुसैन, प्रो. अकील अहमद सिद्दीकी, अजमल इस्लाही ने भी सम्बोधित किया।

इससे पूर्व प्रो. जफर अहमद सिद्दीकी की पुत्री नायमा जफर ने कहा कि उनके स्वर्गीय पिता असाधारण व्यक्तित्व के मालिक थे और वह हर कार्य स्वयं ही करते थे।

प्रो. शम्सुर रहमान फारूकी से सम्बन्धित शोक प्रस्ताव प्रो. सैयद सिराज अजमली और प्रो. जफर अहमद सिद्दीकी से सम्बन्धित शोक प्रस्ताव डा. खालिद सैफुल्लाह ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में शिक्षकों और शोधार्थियों के अलावा गैर शिक्षक कर्मी भी शामिल हुए।

 

जनसंपर्क कार्यालय

अमुवि, अलीगढ़।

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